विश्व आज कितनी तरक्की कर गया है| विज्ञान के क्षेत्र मे, औद्योगिकी के क्षेत्र मे, चिकित्सा के क्षेत्र मे… | पर आज भी दुनिया के लगवाग सभी राष्ट्रों की, और ख़ास कर तीसरी दुनिया कहे जाने वालों देशों की जो मूलभूत समस्याएँ है वो है, गरीबी, भूख और पढाई लिखी की समस्या| हरेक राष्ट्र अपने अपने ढंग से इन समस्याओं से निपटने का रास्ता ढूंढ़ रही है | आज के बच्चे कल देश के भविष्य होंगे | इनको भी तैयार करने की जिम्मेवारी भी हम सबों पे है|
आप किसी न किसी तरह से इन सब समस्याओं का समाधान बन सकते हैं | सही समय पे टैक्स (TAX) जमा करके भी आप समाधान का हिस्सा हैं| इसलिए समय पे टैक्स TAX जरूर भरें ये आपकी जिम्मेदारी है देश के प्रति और देश की करोडो जनता के प्रति|
भारतीय सरकार इन समस्याओं से निपटने के लिए ढेर सारे देश व्यापी प्रोग्राम चला रही है जैसे की भारतीय संभिधान की धारा ८६ के तहत “पढने के अधिकार” (Right to Education) को लागू किया गया है | इसे लागू कर भारत उन १३० देशों के प्रतिष्ठित मंडली मे शामिल हो गया है जहाँ पे बच्चो जिनकी उम्र ६ से १४ वर्ष तक है, उनको पढने का अधिकार दिया गया है| साथ ही लड़कियों को कोम्पुल्सरी पढाई की भी व्यवस्था है | पर गरीबी और भूखमरी, पढाई की व्यवस्था मे दखल देते हैं | इसके समाधान के लिए सरकार ने स्कूल मे दोपहर के भोजन की भी व्यवस्था की है | और इस अभियान मे सरकार अकेली नहीं है | कंधे से कन्धा मिला के चल रही है “अक्षय पात्र” (Akshaya Patra)| ये संस्था करोडो बच्चो की भूख मिटने को प्रतिबद्ध है|
जैसा की महाभारत मे अक्षय पात्र का जिक्र आता है | अक्षय पात्र युधिस्ठिर को भगवान् सूर्य द्वारा दिया गया था | जिसमे भोजन कभी ख़त्म नहीं होता था | और युधिस्ठिर इस अक्षय पात्र की मदद से वनवास के दौरान अनेक ऋषि मुनियों को भोजन करवाते थे | आज “अक्षय पात्र “ फिर भू मंडल पे करोडो बच्चो की क्षुधा शांत कर रहा है|
अक्षय पात्र की शुरुआत बहुत की छोटे स्तर पे कर्नाटक मे ५ स्कूल और १५०० बच्चों से जून २००० मे हुई थी | और फिर जब इन स्कूल के शिक्षकों ने ये देखा की “अक्षय पात्र” द्वारा परोसे गए दोपहर के भोजन से ना केवल बच्चों की संख्या बढ़ रही थी साथ ही उनका स्वस्थ्य और पढाई की और उनकी रूचि भी बढ़ गयी थी | इसे देख अन्य स्कूल मे भी अक्षय पात्र की मांग बढ़ी | फिर २००१ मे सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी किये गए आदेशानुसार सभी सरकारी स्कूल मे दोपहर की भोजन व्यवस्था अनिवार्य कर दी गयी| आज अक्षय पात्र प्रति दिन १२ लाख बच्चो की समुचित भोजन की व्यवस्था करती है| जिनमे भोजन की विशिष्ट का ध्यान रखा जाता है | लगातार दस वर्षों से ये संगठन, श्री मधु पंडित दास जी नेतृत्व मे तत्परता से इस महान कार्य मे लगा हुआ है| श्री मधु पंडित दास जी ने आई आई टी से अपनी पढाई पूरी की उसके बाद आध्यात्मिकता की ओर उनके झुकाव ने उन्हें जीवन का अलग रास्ता अख्तियार किया — देश सेवा का, भगवद भक्ति का | श्री पंडित के नेतृत्व मे बंगलोर का इस्कोन मंदिर का निर्माण हुआ | अक्षय पात्र को एक अनुशाषित व आधुनिक पद्दति द्वारा संचालित संगठन बनाने मे श्री पंडित का योगदान उल्लेखनीय है |
आईये आप भी इस देश सेवा मे भागीदार बनिए | आपके द्वारा लिखा गए एक पोस्ट ५० बच्चो की भूख मिटा रहा है | यदि आप दान करने के इच्छुक हैं तो कृपया अक्षय पात्र की वेब साईट पे - http://www.akshayapatra.org/why-donate
अतिशय सुंदर! नयी जानकारी भी है | आगे के लेखन के लिये हार्दिक शुभेछाये !
धन्यवाद मोहिनी
कोशिश करूँगा और भी बेहतर कर सकूँ
very well written and analysed.
cheers
nice post!:)