Rajiv

Archive for the ‘kavita’ Category

India celebrates – 62nd Republic day

In kavita, Life, News, Pictures, quote, Religion and Spirituality, Story, Thoughts, Writing on January 26, 2011 at 1:45 am

This is a moment of national pride for all Indians here in India and abroad. At this momentous occasion, President Ms Pratibha Patil will unfurl the national Flag on the famous Red Fort. millions of people flock to Red Fort to have a glimpse of this day making history. The World’s largest democracy celebrates its 62nd anniversary.

Every Indian must take an oath, this day, to maintain peace, to grow together, to help each other…. amen

Millions of school colleges central and state organisations, every individual shall hoist Tiranga. And the ceremonies shall end with National Anthem.

Rabindranath Tagore won the Nobel prize for li...

Image via Wikipedia

The national anthem is composition of Nobel laureate Shri Rabindra Nath Tagore. It goes like this:

जन-गण-मन अधिनायक, जय हे
भारत-भाग्‍य-विधाता,
पंजाब-सिंधु गुजरात-मराठा,
द्रविड़-उत्‍कल बंग,
विन्‍ध्‍य-हिमाचल-यमुना गंगा,
उच्‍छल-जलधि-तरंग,
तव शुभ नामे जागे,
तव शुभ आशिष मांगे,
गाहे तव जय गाथा,
जन-गण-मंगल दायक जय हे
भारत-भाग्‍य-विधाता
जय हे, जय हे, जय हे
जय जय जय जय हे।

Jana-gana-mana-adhinayaka, jaya he
Bharata-bhagya-vidhata.
Punjab-Sindh-Gujarat-Maratha
Dravida-Utkala-Banga
Vindhya-Himachala-Yamuna-Ganga
Uchchala-Jaladhi-taranga.
Tava shubha name jage,
Tava shubha asisa mange,
Gahe tava jaya gatha,
Jana-gana-mangala-dayaka jaya he
Bharata-bhagya-vidhata.
Jaya he, jaya he, jaya he,
Jaya jaya jaya, jaya he!

 

Wish You all happy republic day and Holiday 🙂

Meri jeevan – Madhushala

In Crazy4, kavita on December 18, 2009 at 3:27 pm

मदिरालय जाने को घर से चलता है पीनेवाला
‘ किस पथ से जाऊँ? ‘ असमंजस में है वह भोलाभाला
अलग- अलग पथ बतलाते सब, पर मैं यह बतलाता हूँ –
‘ राह पकड़ तू एक चला चल, पा जाएगा मधुशाला ||


हाथों में आने से पहले नाज़ दिखाएगा प्याला
अधरों पर आने से पहले अदा दिखाएगी हाला
बहुतेरे इनकार करेगा साकी आने से पहले
पथिक, न घबरा जाना, पहले मान करेगी मधुशाला॥


यम आयेगा साकी बनकर साथ लिए काली हाला
पी न होश में फ़िर आएगा सुरा- विसुध यह मतवाला
यह अंतिम बेहोशी, अंतिम साकी, अंतिम प्याला है
पथिक, प्यार से पीना इसको फ़िर न मिलेगी मधुशाला॥




धर्मग्रन्थ सब जला चुकी है, जिसके अंतर की ज्वाला,
मंदिर, मसजिद, गिरिजे, सब को तोड़ चुका जो मतवाला,
पंडित, मोमिन, पादिरयों के फंदों को जो काट चुका,
कर सकती है आज उसी का स्वागत मेरी मधुशाला।।



मुसलमान औ’ हिन्दू है दो, एक, मगर, उनका प्याला,
एक, मगर, उनका मदिरालय, एक, मगर, उनकी हाला,
दोनों रहते एक न जब तक मस्जिद मन्दिर में जाते,
बैर बढ़ाते मस्जिद मन्दिर मेल कराती मधुशाला!।

लिखी भाग्य में जितनी बस उतनी ही पाएगा हाला,
लिखा भाग्य में जैसा बस वैसा ही पाएगा प्याला,
लाख पटक तू हाथ पाँव, पर इससे कब कुछ होने का,
लिखी भाग्य में जो तेरे बस वही मिलेगी मधुशाला।



अपने युग में सबको अनुपम ज्ञात हुई अपनी हाला,
अपने युग में सबको अदभुत ज्ञात हुआ अपना प्याला,
फिर भी वृद्धों से जब पूछा एक यही उज्ञल्तऌार पाया –
अब न रहे वे पीनेवाले, अब न रही वह मधुशाला!।



 This post i started to write yesterday when i happen to check my profile on orkut and just get mesmerized by the lines of ‘Madhushala’ (मधुशाला). These are some of my favorite lines from Madhushala.  I search for a video of Madhushala recited by none other than son of the famous poet who penned down these beautiful lines, Harivansha Rai Bachhan (He is the father of one of the bolllywood icons Amitabh Bachhan).
Not finding where did i save it i search it on youtube and was amazed to find that great Manna dey had sung entire  Madhushala. (I) can’t express my delight to hear my favorite lines from one of my favorite singer. Madhushala is third in trilogy, the others being Madhubala (1936) & Madhukalash (1937). read about these on wiki.
  Listen to the great songs
songs by manna dey 1   Songs by Manna Dey 2
Other versions by manna Dey Part 1 , Part 2 , Part 3 , Part 4
Recitation by Amitabh Bachhan
 For lyrics refer this site – Manaskriti

आज मिला अवसर, तब फ़िर क्यों मैं न छकूँ जी- भर हाला
आज मिला मौका, तब फ़िर क्यों ढाल न लूँ जी- भर प्याला
छेड़छाड़ अपने साकी से आज न क्यों जी- भर कर लूँ
एक बार ही तो मिलनी है जीवन की यह मधुशाला॥

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