Rajiv

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Do you see E-Books as a threat to printed books here in India?

In Books, Crazy, quote, Thoughts, Writing on November 10, 2012 at 10:56 am
English: Stack of books in Gould's Book Arcade...

English: Stack of books in Gould’s Book Arcade, Newtown, New South Wales (NSW), Australia. (Photo credit: Wikipedia)

 

https://twitter.com/RHIndia/status/266775484367511552

 

 

 

Technology has opened up many fora to interact with written words. To such an extent that the print media, physical books’  existence feel threatened for the sake of ease as with the example cited above.  But the things are not exactly same with the books-e-books as with stairs-elevator case. The feel of book and reading through a physical book  and even the smell of book has no match for its digital sibling – E books.

 

English: A Picture of a eBook Español: Foto de...

English: A Picture of a eBook Español: Foto de eBook Беларуская: Фотаздымак электроннай кнігі Русский: Фотография электронной книги (Photo credit: Wikipedia)

 

Arvind Passey ‏@arvindpassey (tweet friend says…)   You can carry an entire library in your Kindle… and end up reading not a single book! That’s the truth of digital books of today!

 

There will be a ever ending debate on the space , availability and cost perspective and in most cases the the digital sibling may win over its physical brother but in the end  (for me at least) its the book in hand that matters the most…

 

 

Anamika -Day 3

In Writing on November 4, 2012 at 5:54 am

Relatively better day! After crying her heart out her mom has fed her and she slept for a while, in morning.  Mother is getting better and soon they are planning to discharge but need few more observations. Hopefully in a day or two, baby will be in her Home. After the night episode , I did not want to take any risk , took appointment with a child specialist. I don’t have faith on his diagnostics. It’s not like that I know much about the child and think otherwise than him, It’s gut feeling. He has asked to run some tests on the baby, which I am not in favour of unless I consult my pediatrician.  Got an appointment with him for tomorrow morning. My sister-in-law  asked me if she has been exposed to sunlight without which complications may arise.  Doctors call it physical jaundice, I guess. And Jaundice as a word itself is horror , leave alone for kids.

Getting ready for another gruesome night. But Anamika is more of quiet today… which dreads me more. …

Now, searching for her name…  🙂 There is so much to do  and I suppose ,even as a father, it was never so tiring, but  It’s all so good.

Good night

 

Anamika -Day 2

In Writing on November 3, 2012 at 3:55 am

It was a Hard day today.  All day long she slept well . She had her very first body massage today.  I was dreaded like hell. The nurse swinging her upside down and even hanging her by her soft and delicate head. I was literally surprised , how can a baby endure such heavy massage. om said, even i as a baby had this massage for one year. Now I know why I am like I am. it seems every mother idolizes Dara Singh and wants her baby to  be like. Hence the massage.

I noticed she had actions , one like tendency to vomit, wanted to consult  the doc, nurse said, it’s common.

As night dawned, sleep was far away from her eyes. Tonight she seriously cried. It’s annoying not to understand the cause of her incessant cries. her grand mom  is almost awake , so m I. Mother is asleep under drug dosages.

She is fine while sleeping on the lap, as soon as you put her on cradle/bed she will give her first cry followed with a long one.  And this is being supported by another new born next to our room.

For now she is sleeping …

good night !

 

चेन्नई बदल रहा है …

In Art, Chennai, Life, Photography, Pictures, Places, scribblings, Travel on December 14, 2010 at 2:42 am

आज ऑफिस से जल्दी लौट मै अकेले रूम मे लेटा हुआ था … “डिंग डोंग” तभी कमरे पे किसी ने दस्तक दी… चलो यार कहीं घूम के आते हैं कहाँ जाओगे  बैठो भी कुछ देर मे खाने ही चलेंगे |अरे वो तो चलेंगे… अभी तो चलो शाम की ठंडी हवा का मज़ा ले … मै मन मसोस कर चलने को तैयार हुआ…चेन्नई की शाम,  वैसे तो कोई ख़ास आकर्षण नहीं रहती है …और बाज़ार की भीड़ भाड़ मुझे रास भी नहीं आती… फिर भी,  दोस्त जिद्द कर रहा था तो चलना पड़ा…खैर हम होटल से निकले … वैसे भी आज करने को कुछ ख़ास था नहीं तो हमने सोचा की चलो जब निकले ही हैं तो बाज़ार हो आते हैं… होटल से कुछ ही दुरी पे पोंडी बाज़ार है… बाज़ार की भीड़ भाड़ देख मुझे २००५ की वो शाम याद आ गयी| उस शाम मे अपने इंजीनियरिंग के कुछ दोस्तों के साथ चेन्नई आया हुआ था … फिर जो हुआ उसके बाद मैंने कसम खायी थी की कुछ हो जाए मे चेन्नई वापस नहीं आ रहा… पर शायद होनी को कुछ और ही मंजूर था | और मुझे किस्मत ने मास्टर्स की पढाई के लिए चेन्नई ला फेका… चेन्नई के इन दो सालों ने चेन्नई के प्रति मेरा नज़रिया काफी बदल दिया…यहाँ मैंने अपने जीवन के कुछ यादगार दो साल बिताये, कुछ दोस्त बने जिन्हें आप जीवन पर्यंत याद रखना चाहेंगे  और साथ ही चेन्नई का भोजन … मैंने काफी लुत्फ़ उठाया… अब आपकी बारी है

pondi bazar

पोंडी बाज़ार, टी नगर का जाना माना बाज़ार है | यहाँ आपको आपके उपयोग की सभी चीज़े मिल जायेंगी और ख़ास कर लड़कियों के लिए यहाँ की दुकाने काफी उपयुक्त हैं| चूड़ियों से लेकर स्टायलिश कंगन और झुमके और बिंदी से लेकर सैंडल तक, सभी चीजें मिलेंगी| पर आपको मोल भाव करना पड़ेगा और अगर गलती से भी आपने तमिल की जगह हिंदी की या अंग्रजी के दो शब्द बोल दिए तो फिर दुकानों मे सामानों  की कीमते दुगुनी हो जाती हैं | और फिर आप मोल भाव मे कितने अनुभवी हो उसकी परख होती है|     इसके अलावा और भी कई दुकाने मिलेंगी जैसे की घडी की Titan की शो रूम, फिर एक दो shopping mall हैं जहाँ की आप विविध तरह की खरीददारी कर सकते हैं..और फिर यदि आपको शाम बितानी हो तो  आप या तो सिटी सेंटर चले जाओ या फिर एक्सप्रेस अवेनुए चले जाओ … और फिर खाने के लिए पास मे ही शरवनाभवन हैं जहाँ की आप साउथ इंडियन भोजन का आनंद उठा सकते हैं..
.हालाकी अगर देखें तो आप आज के चेन्नई को पहले के चेन्नई से बिलकुल ही भिन्न पायेंगे , कम से कम भाषा के मामले मे| आज चेन्नई सही रूप से एक मेट्रो की तरह उभरा है जहाँ पे देश के कोने कोने से लोग पढाई करने या फिर अपनी जीवन यापन का जरिया ढूंढने आते हैं | चेन्नई को इंडिया का ऑटो हब या फिर इंडिया का Detrit भी कहा जाता है… यहाँ आपको विश्व की नामचीन ऑटो कम्पनियों की फैक्ट्रीया दिखाई देंगी | और फिर सॉफ्टवेर कम्पनियां के चेन्नई मे बढ़ावे से काफी हद तक यह संभव हो पाया है की आज नोर्थ इंडिया के लोग चेन्नई मे रहने मे संकोच नहीं करते हैं| और ख़ास बात ये भी है की चेन्नई के लोगों ने उन्हें अपनाया भी है | वरना यहाँ अगर आप दो या तीन दशक पहले आये होते  तो फिर आपको उस दौर से गुज़ारना पड़ता जब यहाँ हिंदी के नाम से लोगों मे चिद्द थी…पर नयी पीढ़ी ने बदलाव का रास्ता  अख्तियार किया है |  ये वही चेन्नई है जहां कुछ वर्षों पहले “मेक डोनाल्ड – फ़ूड जोइंट”  ने अपनी एक शाखा खोली थी पर  लोगो के प्रदर्शन की वजह से बंद करनी पड़ी… और आज का चेन्नई है जहाँ हरेक कोने मे कम से कम एक “मेक डी” जरूर मिलेगा | और हाँ उसी के आसपास आपको “के ऍफ़ सी” का भी जोइंट मिलेगा | मैंने अपने दो वर्षो मे अगर चेन्नई को देखा है तो वास्तव मे मेरा आश्चर्य होना लाजमी था… क्युकी मेरा देखने का नज़रिया काफी कुछ जगह की भोजन व्यवस्था पे निर्वर करता है | और आज आपको मै चेन्नई मे पंजाबी भोजन हो या राजस्थानी थाली या बंगाली माछेर झोल  हो या फिर गुजरती थाली या लिट्टी चोखा या फिर जैन भोजनालय या फिर मारवाड़ी भोजन  … क्या चीज़ कहाँ मिलती है वो मै बता सकता हूँ… इससे आप स्वतः अंदाजा लगा सकते हैं की जहाँ के खाने मे इतनी विवधता हो, वो जगह  नागवार तो कतई नही हो सकता है.| और अगर आप हिंदी फिल्मों के बिना नहीं जी सकते, तो ख़ास आपके लिए हैं सत्यम, इनोक्स, पीवीआर, अनु-एगा  और भी ढेर सारे चित्रपट जहाँ आप हिंदी फिल्मों का लुत्फ़ उठा सकते हैं |
दार्शनिक स्थलों मे जैसे की मदुरै, रामेश्वरम, तिरुपति आदि पवित्र स्थल चेन्नई से कुछ ही दूरी पे हैं | चेन्नई का मरीना बीच या फिर महाबलीपुरम या पोंडिचेरी देश विदेश के पर्यटकों की राजधानी बना रहता है| जहाँ आप महाबलीपुरम मे पुराने राजाओं के निर्माण किये गए इमारतें देख सकते हो तो  पोंडिचेरी मे आप फ्रेंच रहन सहन का आनंद उठा सकते हैं  साथ ही  वहां देखने को काफी कुछ है जैसे और्बिन्दो आश्रम, औरोविला इत्यादी |
शहर मे अगर पठान पाठन की उत्तम व्यवस्था न हो तो फिर उस जगह का महत्व नहीं रहता | पर चेन्नई मे आपको नर्सरी से लेकर मास्टर्स की डिग्री तक के अच्छे कालेज मिल जायेंगे, जैसे की लोयोला कालेज, अन्ना उनीवेर्सिटी, आई आई टी मद्रास , और अनगिनत इंजीनियरिंग मेडिकल और ला कालेज मिलेंगे…
फिर शहर तेजी से अपने आप को विकसित कर रहा है चाहे वो रियल एस्टेट का बाज़ार 

aerial view of kathipada junction

हो या रिटेल सामानों का  या फिर बढती जनसँख्या के रहने की व्यवस्था की बात हो …

चेन्नई बदल रहा है …
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